Quick Summary:

महाशिवरात्रि व्रत कथा और पूजा विधि – जानें शिव भक्तों के लिए इसका आध्यात्मिक महत्व हिंदी महाशिवरात्रि भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस…

महाशिवरात्रि व्रत कथा और पूजा विधि – जानें शिव भक्तों के लिए इसका आध्यात्मिक महत्व

हिंदी

महाशिवरात्रि भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हैं, व्रत रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं। 

महाशिवरात्रि का महत्व (भगवान शिव की महिमा)
महाशिवरात्रि का यह पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है, क्योंकि माना जाता है कि इसी दिन उनका विवाह हुआ था। शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। 

  • पापों का नाश: शिवलिंग का जलाभिषेक करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  • मनोकामनाओं की पूर्ति: रात्रि जागरण और मंत्र जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
  • विवाह संबंधी बाधाओं का निवारण: जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, वे महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करके शीघ्र विवाह का वरदान प्राप्त कर सकते हैं।
  • रोग और दरिद्रता से मुक्ति: इस दिन शिव की भक्ति करने से रोग, शोक, दरिद्रता और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
  • सृष्टि का आरंभ: कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन सृष्टि का आरंभ अग्निलिंग के उदय से हुआ था, जो महादेव का एक विशालकाय स्वरूप है। 

महाशिवरात्रि पूजा विधि

Maha Shivratri

महाशिवरात्रि पर पूजा करने के लिए यहाँ एक सरल विधि दी गई है: 

  1. व्रत का संकल्प: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और भगवान शिव की पूजा और व्रत का संकल्प लें।
  2. स्नान: पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।
  3. शिवलिंग का अभिषेक: शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक या पंचामृत से अभिषेक करें।
  4. अर्पण करें: शिवलिंग पर भस्म, सफेद चंदन, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, बेर और गन्ना चढ़ाएँ। विवाहित महिलाएँ देवी पार्वती को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएँ।
  5. मंत्र जाप और आरती: घी का दीपक और धूप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें।
  6. रात्रि जागरण: महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। भक्त पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना और मंत्र जाप करते हैं।
  7. व्रत का पारण: भक्त रात्रि के चार प्रहरों में शिव की पूजा करते हैं और अगले दिन सूर्योदय के बाद विधिपूर्वक व्रत खोलते हैं। 

महाशिवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कहानियाँ
महाशिवरात्रि से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं, जिनमें से दो प्रमुख हैं: 

  1. शिव और पार्वती का विवाह: यह सबसे लोकप्रिय कहानियों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव गहरे ध्यान में लीन हो गए थे। देवी पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर, शिव ने उन्हें स्वीकार किया और महाशिवरात्रि के दिन उनका विवाह हुआ।
  2. अमरनाथ की अमर कथा: एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान शिव ने अमरता का रहस्य माता पार्वती को अमरनाथ गुफा में सुनाया था। शिव जब पार्वती को कथा सुना रहे थे, तब कबूतरों के एक जोड़े ने भी इस रहस्य को सुन लिया था। जब कथा समाप्त हुई, तो शिव ने उन कबूतरों को मारने का प्रयास किया। तब कबूतरों ने कहा कि वे अमर कथा सुनने के बाद अमर हो गए हैं, और अगर शिव उन्हें मारते हैं तो उनकी कथा झूठी हो जाएगी। इस पर शिव ने उन्हें जीवनदान दिया। माना जाता है कि आज भी अमरनाथ गुफा में इन कबूतरों का दर्शन होता है। 

Maha Shivratri – Lord Shiva’s Glory, Puja Method and Stories

Maha Shivratri is an important Hindu festival dedicated to Lord Shiva, celebrated annually on the 14th day of the dark fortnight in the month of Phalguna. On this night, devotees sing hymns, observe fasts, and perform special rituals to worship Lord Shiva. 

The Significance of Maha Shivratri (Glory of Lord Shiva)
The festival commemorates the divine union of Lord Shiva and Goddess Parvati, as it is believed that they were married on this night. According to the Shiva Purana, worshipping Lord Shiva and Goddess Parvati on Maha Shivratri brings all kinds of happiness to devotees. 

  • Destruction of Sins: Performing Abhishek (ritual bathing) of the Shiva Lingam destroys all sins and frees a person from suffering.
  • Fulfillment of Wishes: Staying awake all night (Jagran) and chanting mantras fulfills all the wishes of devotees.
  • Removal of Marriage Obstacles: People facing delays in marriage can please Lord Shiva on Maha Shivratri to receive blessings for a quick marriage.
  • Freedom from Disease and Poverty: Devotion to Shiva on this day leads to freedom from disease, sorrow, poverty, and debt.
  • Beginning of Creation: Some legends state that on this day, creation began with the emergence of the Jyotirlinga, a giant pillar of light representing Shiva. 

Maha Shivratri Puja Method
Here is a simple method for performing the puja: 

  1. Vow (Sankalp): Wake up before sunrise, take a bath, and make a vow to observe the fast and perform the puja.
  2. Abhishek: Bathe the Shiva Lingam with water, milk, curd, honey, and ghee (Panchamrit).
  3. Offerings: Offer bel leaves, datura flowers, white sandalwood paste, berries, and sugarcane to the Shiva Lingam. Married women offer makeup items to Goddess Parvati.
  4. Mantra Chanting and Aarti: Light a ghee lamp and incense sticks, and chant the mantra “Om Namah Shivaya”. Recite the Shiva Chalisa and sing Lord Shiva’s Aarti at the end.
  5. Night-long Vigil (Jagran): Staying awake throughout the night is considered highly significant. Devotees chant mantras and worship Lord Shiva all night.
  6. Breaking the Fast: The fast is usually broken the next day after performing the morning prayers. 

Mythological Stories Related to Maha Shivratri
There are several legends associated with this night, including: 

  1. The Marriage of Shiva and Parvati: This is one of the most popular stories. After Goddess Sati’s self-immolation, Lord Shiva went into deep meditation. Goddess Parvati performed intense penance to have Shiva as her husband. Pleased with her devotion, Shiva accepted her, and they were married on Maha Shivratri.
  2. The Story of Amarnath: According to another legend, Lord Shiva narrated the secret of immortality to Goddess Parvati in the Amarnath Cave. A pair of pigeons overheard the story and became immortal. Even today, it is believed that a pair of pigeons can be seen in the Amarnath Cave.

महा शिवरात्रि पूजा कैसे की जाती है?

शिवरात्रि पूजा के लिए, सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर शिवलिंग या शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें। फिर, शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी आदि से अभिषेक करें। इसके बाद वस्त्र, जनेऊ, बेलपत्र, धतूरा, फूल, धूप, दीपक, अक्षत और नैवेद्य (मिठाई) अर्पित करें। मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।

पूजा की तैयारी

  • स्नान और वस्त्र: शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान की शुद्धि: पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • प्रतिमा स्थापना: शिवलिंग या शिव परिवार (शिव, माता पार्वती और गणेश) की प्रतिमा को स्थापित करें।
  • पूजा सामग्री: पूजा के लिए गंगाजल, दूध, दही, शहद, ghee, बेलपत्र, धतूरा, फूल, धूप, दीप, अक्षत (चावल), मौली (कलावा), चंदन, रोली और नैवेद्य (मिठाई या फल) इकट्ठा करें।

पूजा विधि

  • दीपक जलाना: घी का दीपक जलाकर पूजा शुरू करें।
  • अभिषेक: शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। यह पंचामृत अभिषेक कहलाता है।
  • वस्त्र और जनेऊ: भगवान शिव को वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें।
  • तिलक: शिवजी को चंदन और माता पार्वती को रोली या हल्दी का तिलक लगाएं।
  • बेलपत्र और फूल: भगवान शिव की प्रिय वस्तुएं, जैसे कि बेलपत्र (उलटी साइड स्पर्श कराकर), धतूरा, भांग और अन्य सफेद फूल अर्पित करें।
  • अन्य सामग्री: भगवान को अक्षत, धूप, दीपक और इत्र भी चढ़ाएं।
  • भोग: खीर या अन्य किसी मिठाई और फलों का भोग लगाएं।
  • मंत्र जाप और आरती: ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें और अंत में भावपूर्वक आरती करें।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • भगवान शिव को केवड़ा, केतकी, चमेली और जूही जैसे फूल अर्पित न करें।
  • शिवलिंग या मूर्ति की पूरी परिक्रमा न करें।
  • शंख का प्रयोग शिव पूजा में नहीं किया जाता।

 

महाशिवरात्रि व्रत की कहानी क्या है?

महाशिवरात्रि की सबसे प्रसिद्ध कथा एक शिकारी चित्रभानु से जुड़ी है, जिसने अनजाने में शिवरात्रि का व्रत पूरा कर शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाए, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। अन्य कथाओं के अनुसार, इस दिन शिवजी ने माता पार्वती से विवाह किया था, इसलिए यह उनके मिलन का प्रतीक भी है।

Lord Shiva, known as Mahadev, meditating peacefully on Mount Kailash — symbolizing supreme power, wisdom, and tranquility. background with shivling design vector

चित्रभानु शिकारी की कथा

ऋण और बंदी: चित्रभानु नाम का एक शिकारी साहूकार का कर्जदार था। कर्ज न चुका पाने के कारण उसे बंदी बना लिया गया, संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी।

जंगल में प्रवेश: शाम को साहूकार ने उसे कर्ज चुकाने का वचन लेकर छोड़ दिया। वह शिकार की तलाश में जंगल गया, लेकिन दिन भर की भूख-प्यास से व्याकुल था।

शिवलिंग पर बिल्वपत्र: जंगल में एक बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था, जो बिल्वपत्रों से ढंका हुआ था। शिकार के दौरान शिकारी ने जो टहनियां तोड़ीं, वे शिवलिंग पर गिर गईं, जिससे अनजाने में उसका व्रत भी पूरा हो गया।

हिरणियों और हिरण का मिलन: रातभर में कई हिरणियाँ अपने परिवार सहित उससे मिलीं और जीवनदान की याचना की। शिकारी ने उनकी दयनीय प्रार्थना सुनकर उन्हें जाने दिया।

पूरे परिवार का आना: सभी हिरणियों ने अपने पति हिरण को यह बात बताई। शिकारी ने भी हिरण की बातों से प्रभावित होकर उसे भी जाने दिया और सभी ने मिलकर शिकारी के पास आने का वादा किया।

मोक्ष की प्राप्ति: सुबह जब हिरण अपने पूरे परिवार के साथ आया, तो शिकारी को ग्लानि हुई और उसने सबको जीवनदान दे दिया। इस प्रकार अनजाने में शिवरात्रि का व्रत और पूजा करने से चित्रभानु को मोक्ष की प्राप्ति हुई और उसे शिवलोक मिला।

शिव-पार्वती विवाह की कथा

मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था।

माता पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए कठिन तपस्या की थी, और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी राजी हुए और दोनों का विवाह संपन्न हुआ।

इसी खुशी में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है, जो शिव-गौरी के मिलन और प्रेम का प्रतीक है।

Mahashivratri Vrat Katha : महाशिवरात्रि व्रत कथा विस्तार सहित, इस कथा के पाठ से व्रतियों को मिलता है व्रत का संपूर्ण फल

महाशिवरात्रि व्रत कथा चित्रभानु नामक एक भील शिकारी की कथा है जिसने अनजाने में ही शिवरात्रि का व्रत कर लिया। रात भर जगते हुए चित्रभानु ने अनजाने में ही महाशिवरात्रि पर शिवजी के ऊपर बेल के पत्ते अर्पित किए जिसके पुण्य से वह शिवलोक में स्थान पा गया। महाशिवरात्रि के दिन इस कथा का पाठ करने से व्यक्ति के पाप कट जाते हैें और शिवलोक की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि व्रत में शिवजी की इस कथा का पाठ करना बहुत ही शुभ फलदायी बताया गया है। शिव पुराण में भी इस व्रत की महिमा बताई गई है। शिव पुराण के अनुसार, जाने अनजाने में भी जो मनुष्य और जीव महाशिवरात्रि का व्रत कर लेता है वह शिव कृपा का भागी बन जाता है और उससे यमराज के दूत भी दूर रहते हैं। इसलिए महाशिवरात्रि व्रत में शिव भक्तों को महाशिवरात्रि की इस कथा का पाठ जरूर करना चाहिए।

महाशिवरात्रि व्रत कथा
पूर्वकाल की बात है चित्रभानु नामक एक शिकारी था। वह शिकार करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था। उस शिकारी पर साहूकार का काफी कर्ज था। लेकिन वह उसका कर्ज समय पर नहीं चुका पाया। फिर साहूकार ने शिकारी को शिव मठ में बंदी बना लिया। जिस दिन उसे बंदी बनाया गया उस दिन शिवरात्रि थी। चतुर्दशी के दिन उसने शिवरात्रि व्रत की कथा सुनी और शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के बारे में कहा। उसके बाद वह फिर शिकार की खोज में निकला। बंदीगृह में रहने के कारण वह बहुत भूखा था। शिकार की तलाश में वह बहुत दूर निकल आया। अंधेरा होने पर उसने जंगल में ही रात बिताने का फैसला किया और एक पेड़ पर चढ़ गया।

उस पेड़ के नीचे शिवलिंग था जो बेलपत्र के पत्तो से ढका हुआ था। शिकारी को उसके बारे में जानकारी नहीं थी। पेड़ पर चढ़ते समय उसने जो टहनियां तोड़ी वह शिवलिंग पर गिरती रहीं। इस तरह से भूखे प्यासे रहकर शिकारी का शिवरात्रि का व्रत हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए। रात के समय एक हिरणी पानी पीने तालाब पर आई। शिकारी जैसे ही उसका शिकार करने जा रहा था भी हिरणी बोली मैं गर्भवती हूं शीघ्र ही प्रसव करुंगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे। मैं बच्चे को जन्म देकर तुरंत तुम्हारे सामना आ जाउंगी। तब मुझे मार लेना।

शिकारी ने हिरणी को जाने दिया। इस दौरान अनजाने में कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए। इस तरह उसने अंजाने में प्रथम प्रहर की पूजा भी संपन्न कर ली। कुछ देर बार एक हिरणी उधर से निकली। जैसे ही शिकारी उसे मारने के लिए धनुष बाण चढ़ाया तो हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया ह शिकारी में थोड़ी देर पहले ही ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातूर विरहिणी हूं। अपने प्रिय की तलाश में हूं। अपनी पति से मिलकर मैं तुम्हारे पास आ जाउंगी। शिकारी ने उसे भी जाने दिया। रात का आखिरी पहर बीत रहा था। तब भी कुछ बेल पत्र शिवलिंग पर जा गिरे।

ऐसे में शिकारी ने अनजाने में ही अंतिम पर की पूजा भी कर ली। इस दौरान वहां एक हिरणी अपने बच्चों के साथ आई। उसने भी शिकारी से निवेदन किया और शिकारी ने उसे जाने दिया। इसके बाद शिकारी के सामने एक हिरण आया। शिकारी ने सोचा अब तो मैं इसे यहां ने नहीं जाने दूंगी इसका शिकार करुंगी। तब हिरण ने उससे निवेदन किया कि मुझे कुछ समय के लिए जीवनदान दे दो। शिकारी ने पूरा रात की घटना उस हिरण को सुना दी। तब हिरण ने कहा कि जिस तरह से तीनों पत्नियां प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी। जैसे तुमने उन्हें विश्वापात्र मानकर छोड़ा है मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं।

शिकारी ने उसे भी जाने दिया।
इस तरह सुबह हो गई।
उपवास, रात्रि जागरण, और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से अनजान में ही शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई।
लेकिन, अनजाने में हुई पूजा का परिणाम उसे तत्काल मिला।
थोड़ी देर बार हिरण और उसका परिवार शिकारी के सामने आ गया।
उन सभी को देखकर शिकारी को बहुत गिलानी हुई और उसने पूरे परिवार को जीवनदान दे दिया।
अनजाने में शिवरात्रि व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
जब मृत्यु काल में यमदूत जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया और उसे शिवलोक ले गए।
शिवजी की कृपा से चित्रभानु अपने पिछले जन्म को याद रख पाए।
शिवरात्रि के महत्व को जानकर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए।

https://www.vaishnavji.in