Goa ke 10 Prasiddh Mandir – Bhakti aur Shanti ke Pavitra Sthal गोवा को प्रायः लोग केवल समुद्र तटों और पार्टी स्थलों के लिए जानते हैं, परंतु यह भूमि अपने प्राचीन मंदिरों, भक्ति और आध्यात्मिक संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध…
Goa ke 10 Prasiddh Mandir – Bhakti aur Shanti ke Pavitra Sthal
गोवा को प्रायः लोग केवल समुद्र तटों और पार्टी स्थलों के लिए जानते हैं, परंतु यह भूमि अपने प्राचीन मंदिरों, भक्ति और आध्यात्मिक संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ के मंदिर मराठी और दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का अनोखा संगम प्रस्तुत करते हैं। आइए जानते हैं गोवा के दस प्रमुख मंदिरों के बारे में जो न केवल श्रद्धा के प्रतीक हैं, बल्कि भारतीय परंपरा की समृद्ध धरोहर भी हैं।
श्री मंगेशी मंदिर, पोंडा
भगवान शिव के “मंगेश” रूप को समर्पित यह मंदिर गोवा का सबसे प्रसिद्ध और भव्य मंदिर माना जाता है। इसका निर्माण सन् 1560 के आसपास हुआ था और इसकी ऊँची दीपमाल तथा सुंदर वास्तुकला मराठा शैली को दर्शाती है। रात्रि के समय जब दीप जलते हैं, तो मंदिर का सौंदर्य अद्भुत दिखाई देता है। हर सोमवार को विशेष आरती होती है और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को असीम शांति और सुख की अनुभूति होती है।
स्थान: मंगेशी गाँव, पोंडा, गोवा
श्री शांतादुर्गा मंदिर, कवले
देवी पार्वती के शांत रूप “शांतादुर्गा” को समर्पित यह मंदिर गोवा के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक है। लाल पत्थरों और सफेद गुंबदों से सुसज्जित यह मंदिर स्थापत्य कला का सुंदर उदाहरण है। कथा के अनुसार, देवी ने भगवान शिव और विष्णु के बीच के विवाद को शांत किया था। हर वर्ष यहाँ “जात्रा उत्सव” बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है और मंदिर परिसर की हरियाली मन को शांति प्रदान करती है।
स्थान: कवले, पोंडा, गोवा
श्री महालसा नारायणी मंदिर, मर्दोल
यह मंदिर देवी महालसा नारायणी को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु के मोहिनी रूप के रूप में पूजा जाता है। यहाँ की घंटा प्रसिद्ध है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह झूठ बोलने पर नहीं बजती। 16वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर में स्वर्णमंडित देवी की मूर्ति स्थापित है। हर वर्ष “पालखी उत्सव” में हजारों भक्त भाग लेते हैं और देवी से समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
स्थान: मर्दोल, पोंडा, गोवा
श्री महालक्ष्मी मंदिर, बांदोरा
देवी लक्ष्मी को समर्पित यह गोवा का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। पुर्तगाली शासन के दौरान भी यह मंदिर सुरक्षित रहा, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ जाती है। देवी की मूर्ति काले पत्थर की है और हर शुक्रवार को विशेष पूजा होती है। दीपोत्सव के समय यह मंदिर दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है। यहाँ आने से धन, सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है।
स्थान: बांदोरा, पोंडा, गोवा
श्री नवदुर्गा मंदिर, मडकई
यह मंदिर देवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है और यहाँ हर वर्ष “नवदुर्गा जात्रा” बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। स्थानीय लोग देवी को अपनी कुलदेवी मानते हैं। मंदिर की काले पत्थर की मूर्ति अत्यंत भव्य है और वातावरण शांति से भरा है। यहाँ आने से आत्मबल, साहस और भक्ति की शक्ति प्राप्त होती है।
स्थान: मडकई, गोवा
श्री सप्तकोटेश्वर मंदिर, नार्वे
यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव के सप्तकोटेश्वर रूप को समर्पित है। इसका निर्माण कदंब राजाओं ने करवाया था और बाद में पुर्तगालियों द्वारा नष्ट किए जाने के पश्चात पुनर्निर्मित किया गया। मंदिर की स्थापत्य शैली में इंडो-पुर्तगाली प्रभाव देखने को मिलता है। यहाँ की शिवरात्रि का उत्सव अत्यंत प्रसिद्ध है और मंदिर परिसर की शांति मन को मोह लेती है।
स्थान: नार्वे, बिचोलिम, गोवा
श्री कामाक्षी मंदिर, शिरोडा
यह मंदिर देवी पार्वती के “कामाक्षी” रूप को समर्पित है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था और मंदिर का दीपस्तंभ अत्यंत आकर्षक है। नवरात्रि में यहाँ विशेष पूजा और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देवी को शक्ति और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। मंदिर परिसर में फैली हरियाली और शांति मन को आनंद देती है।
स्थान: शिरोडा, पोंडा, गोवा
श्री रामनाथ मंदिर, बांदोरा
भगवान शिव के “रमनाथ” रूप को समर्पित यह मंदिर उस स्थान पर स्थित है जहाँ कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने रावण वध के बाद पूजा की थी। मंदिर की दीपमाल और सरोवर इसे अत्यंत पवित्र बनाते हैं। हर वर्ष कार्तिक मास में यहाँ भव्य उत्सव मनाया जाता है। मंदिर का वातावरण भक्ति और शांति से परिपूर्ण है।
स्थान: बांदोरा, पोंडा, गोवा
श्री लक्ष्मण मंदिर, वेरना
यह मंदिर भगवान लक्ष्मण को समर्पित है और प्राचीन वैष्णव मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर की दीवारों पर सुंदर नक्काशी और मूर्तिकला दिखाई देती है। हर वर्ष राम नवमी पर यहाँ विशेष उत्सव आयोजित किया जाता है। श्रद्धालु यहाँ धर्म, बल और आत्मशक्ति की प्राप्ति के लिए आते हैं।
स्थान: वेरना, गोवा
श्री भुवनेश्वरी मंदिर, साल
देवी भुवनेश्वरी को समर्पित यह प्राचीन मंदिर गोवा की आध्यात्मिक विरासत का एक सुंदर उदाहरण है। देवी को ज्ञान और शक्ति की देवी माना जाता है। हर अमावस्या को यहाँ विशेष पूजा होती है और वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार से वातावरण पवित्र हो उठता है। यहाँ ध्यान और साधना के लिए शांत वातावरण बना रहता है।
स्थान: साल, बिचोलिम, गोवा
निष्कर्ष
गोवा केवल समुद्र तटों और आधुनिक जीवनशैली का प्रदेश नहीं है, बल्कि यह भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता की भूमि भी है। यहाँ के मंदिर न केवल स्थापत्य कला का प्रतीक हैं, बल्कि श्रद्धा और शांति के सजीव केंद्र हैं। इन मंदिरों की यात्रा से आत्मा को सुकून और जीवन में संतुलन का अनुभव मिलता है।