Bajrang Baan – Shri Hanuman Ji Ki Mahima aur Paath Bajrang Baan Shri Hanuman Ji ka ek pavitra stotra hai, jo unki shakti, bhakti aur devotion ko darshata hai. Iska paath karne se bhakton ke jeevan me sahas, shakti aur protection ka vikas hota hai.Ye…
Bajrang Baan – Shri Hanuman Ji Ki Mahima aur Paath
Bajrang Baan Shri Hanuman Ji ka ek pavitra stotra hai, jo unki shakti, bhakti aur devotion ko darshata hai. Iska paath karne se bhakton ke jeevan me sahas, shakti aur protection ka vikas hota hai.
Ye stotra sankat harne aur negative energy door karne ke liye bhi bahut shubh maana gaya hai. Rozana paath karne se man aur sharir me positive energy ka vikas hota hai aur bhakt ki life me shanti aur spiritual growth aati hai.
Bajrang Baan Ka Mahatva
Bajrang Baan ka paath karne se bhakton ko milte hain:
- Shakti aur sahas
- Life ke obstacles aur negativity se protection
- Mental peace aur spiritual growth
- Shri Hanuman Ji ki kripa aur blessings
Ye stotra unki bhakti aur selfless seva ka ek pramukh example hai. Rozana paath karne se bhakton ka man aur sharir dono energized aur positive rehte hain
बजरंग बाण की महिमा (Bajrang Baan Ki Mahima ):
बजरंग बाण भगवान हनुमान जी का वह स्तोत्र है, जो नकारात्मक शक्तियों, भय और संकटों को दूर करता है।
इसका पाठ मंगलवार या शनिवार को सुबह स्नान के बाद स्वच्छ मन से किया जाता है।
कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से बजरंग बाण का पाठ करता है, उसके जीवन से सभी बाधाएँ, भय और क्लेश दूर हो जाते हैं।
यह पाठ मन को एकाग्र करता है और आत्मविश्वास को अत्यधिक बढ़ाता है।
मुख्य लाभ:
भय और मानसिक तनाव से मुक्ति
नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
जीवन में साहस और आत्मबल की वृद्धि
संकटों से रक्षा और सफलता की प्राप्ति
बजरंग बाण
॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमंत संत हितकारी ।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥०१॥
जन के काज विलम्ब न कीजै ।
आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥०२॥
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा ।
सुरसा बद पैठि विस्तारा ॥०३॥
आगे जाई लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका ॥०४॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परम पद लीन्हा ॥०५॥
बाग उजारी सिंधु महं बोरा ।
अति आतुर यम कातर तोरा ॥०६॥
अक्षय कुमार मारि संहारा ।
लूम लपेट लंक को जारा ॥०७॥
लाह समान लंक जरि गई ।
जय जय धुनि सुर पुर महं भई ॥०८॥
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी ।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥०९॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता ।
आतुर होय दुख हरहु निपाता ॥१०॥
जै गिरिधर जै जै सुखसागर ।
सुर समूह समरथ भटनागर ॥११॥
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।
बैरिहिं मारू बज्र की कीले ॥१२॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो ।
महाराज प्रभु दास उबारो ॥१३॥
ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ॥१४॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा ।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ॥१५॥
सत्य होहु हरि शपथ पाय के ।
रामदूत धरु मारु धाय के ॥१६॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा ।
दु:ख पावत जन केहि अपराधा ॥१७॥
पूजा जप तप नेम अचारा।
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ॥१८॥
वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं ।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥१९॥
पांय परों कर जोरि मनावौं ।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥२०॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता ।
शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥२१॥
बदन कराल काल कुल घालक ।
राम सहाय सदा प्रति पालक ॥२२॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर ।
अग्नि बेताल काल मारी मर ॥२३॥
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की ।
राखु नाथ मरजाद नाम की ॥२४॥
जनकसुता हरि दास कहावौ ।
ताकी शपथ विलम्ब न लावो ॥२५॥
जय जय जय धुनि होत अकाशा ।
सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ॥२६॥
चरण शरण कर जोरि मनावौ ।
यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ॥२७॥
उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई ।
पांय परौं कर जोरि मनाई ॥२८॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता ।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥२९॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल ।
ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥३०॥
अपने जन को तुरत उबारो ।
सुमिरत होय आनन्द हमारो ॥३१॥
यह बजरंग बाण जेहि मारै ।
ताहि कहो फिर कौन उबारै ॥३२॥
पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षा करैं प्राण की ॥३३॥
यह बजरंग बाण जो जापै ।
तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे ॥३४॥
धूप देय अरु जपै हमेशा ।
ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥३५॥
॥ दोहा ॥
प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ॥
Bajrang Baan Paath Aur Fayde
Bajrang Baan ka paath karne se bhakton ke jeevan me:
- Courage aur strength aati hai
- Negative forces aur obstacles se protection milta hai
- Life me success aur mental peace aata hai
- Bhakton ki spiritual journey aur devotion strong hoti hai
Rozana paath karne se bhakton ka faith aur devotion bhi badhta hai aur wo apne karmo me sahas aur dhairya ke saath aage badh sakte hain.
Conclusion
Bajrang Baan Shri Hanuman Ji ke heroic deeds aur bhakti ka pavitra stotra hai. Iska paath karne se bhakton ke jeevan me shakti, sahas aur spiritual growth aata hai.
Shri Hanuman Ji ki kripa se aap life challenges face kar sakte hain, goals achieve kar sakte hain aur devotion ke saath jee sakte hain.
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